Sunday, April 21, 2013

सफ़र जारी है और मन्ज़िल निकल गई

सफ़र जारी है और मन्ज़िल निकल  गई,
महोब्बत तो हो गई पर उमर निकल गई,

जाम भी खाली है और महफ़िल भी है उदास
मैखाने का क्या कसूर जब साकी की खबर नहीं

याद थी वो ग़ज़ल, अब तो वो भी बिसर गई,
होठो पर तो थी अभी अब जाने किधर गई

जहाँ जाने को पैर बढ़ जाते थे आपे आप
अब वो गली तॊ है, पर उसमे कोई घर नहीं

दुनिया में करता है कोई मुझ से भी महोब्बत,
मुझे क्या मालुम मुझे कोई खबर नहीं

Thursday, October 11, 2012

दिल का दर्द

ज़िन्दगी में दर्द और भी है कहते हो हर बात को तुम,
रोता है कोई आसमानों में कहते हो बरसातों को तुम |

दिल का दर्द छुपाना तो सीख लिया अब तुमने,
छुपाओगे कैसे अपनी आवाज़ की खराशो को तुम ||

Thursday, September 20, 2012

बेबसी

दिल की आग ये या, बेबसी है ये !
 ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं, खुदख़ुशी है ये !!
क्यों करें कुछ ऐसा, की याद करे ज़माना !
न कुछ कर सके, तो क्या ज़िन्दगी है ये !!