Posts

ग़ालिब के मनपसंद शेर

अब रचनात्मकता के कुछ पढ़ते आकाल के कारण कुछ मौलिक की जगह में अपने अपने पसंदीदा लेखको और शायरों के कुछ अच्छी रचनाये प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हु ॥ पहेली किस्त के रूप में में अपने पसंदीदा शायर जनाब मिर्जा ग़ालिब के कुछ मेरे पसंदीदा शेर पोस्ट कर रहा हु। क्योंकि कहते है ना 'हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे कहते हैं पर कहते है की ग़ालिब का अंदाज़-ए-बयाँ और ही हैं' १। 'न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता, तो ख़ुदा होता डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता'! २। 'ग़ालिब वज़ीफ़ाख़्वार हो दो शाह को दुआ वो दिन गए कि कहते थे नौकर नहीं हूँ मैं' ३। चिपक रहा है बदन पर, लहू से पैराहन, हमारी जेब को अब हाजते-रफू क्या है। ४। 'हुई मुद्दत के 'ग़ालिब' मर गया, पर याद आता है वो हर बात पर कहना के यूँ होता तो क्या होता' ५। घर जब बना लिया है तेरे दर पर कहे बग़ैर जानेगा तू भी अब न मेरा घर कहे बग़ैर ६। मोहब्बत में नही है है फर्क जीने मरने का , उसी को देख कर जीते है जिस काफिर पर दम निकले ७। हर एक बात पर कहते हो तुम की तू क्या है! तुम ही कहो की ये अंदाजे गुफात...

ब्रेकिंग न्यूज़

Image
आतंकवादी हमला हुआ मरे ढेर से लोग ,टीवी वाले लाशो पर करे शोर पर शोर , करे शोर पर शोर खून की खेले होली ,आतंकी के साथ मारदो इन को भी एक एक गोली सब से पहेले सब से तेज़ , करे ये हर समय बहस देश हित का सोचे बिना ये करे भावनाओं को कैश लोगो की मौत को बना कर ब्रेकिंग न्यूज़ , बस चले तो ये लाशो से भी मांगे व्यूस , लाशो से भी मांगे व्यूस, इनके लिए है ये मेगा इवेंट, जम गए फौज के पीछे लगा कर ये तम्बू टेंट और देश के नेता है , लगे है राजनीती करने नेता करे बाते बाते पर कोई ना जाए बॉर्डर पर मरने कोई न जाए बॉर्डर पर मरने , देश में ही करे ये भेद हिंदू को मुस्लिम से लड़ा कर करें एक थाली में छेद सो रहे ग्रह मंत्री , मन मोहन का भाषण भी मौन , केवल कहने भर से होता क्या है , प्रश्न ये की करे कुछ कौन ?

अपने अपने मदिरालय

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला, 'किस पथ से जाऊँ?' असमंजस में है वह भोलाभाला, अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ - 'राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।' क्या समझे , नही नही में कोई प्रवचन नही दे रहा हु ,, की बच्चन साहब का कहना ये है की अगर जीवन में एक राह चलोगे के तो आपने जीवन के सपने को पा सकते है पर में तो बता रहा हु की शयद उस समय भी परिस्थितिया कुछ ऐसी होंगी जैसी की आज है। गाँधी के इस देश में सारी राहे किसी ना किसी मधुशाला में ही जा कर ख़तम होती है, चारो और मधुशालाये ही है। चाहे वों गन्ने के रस की ही क्यो ना हो पर मधुशाला तो है, कहेने का मतलब ये है की हर व्यक्ति कही भी जाए प्हुचाता मधुशाला ही है, चलो पॉइंट पर आता हु, शायद आप बोलेंगे की पागल हो गया है ये आदमी तो ,, पर नही लोग सब और मस्त है , क्या हो रहा है चारो और कोई मतलब नही बस अपन घर पहुँच जाए काफ़ी है .....

भारत निर्माण

Image
भारत निर्माण आइये में आपको भारत निर्माण की विधि बताता हूँ , ये ज़्यादा कठिन नही है , सब से पहेले एक अच्छा सा सुंदर सा देश जो की वास्तव में ज़मीन का एक टुकडा होता है जिसे की लोग अपनी भावना अनुसार मर्ताभूमि भी कहेते है, चलिए में आप को विधि बनता हु , हा वों जो ज़मीन का टुकडा है उसके २ या ३ टुकड़े कर दी जिए , धर्म के आधार पर , एक को पाकिस्तान नाम दीजिये और दुसरे को हिन्दुस्तान , अब जो साइड में पाकिस्तान है उसे भाषा के आधार पर दो भाग में बात दीजिये , बंगाली मुसलमान वाला बांग्लादेश और बाकी बचा उर्दू बोलने वाला पकिस्तान, अब ये पाकिस्तान भी फलतीउ नही है , इसे साइड में रख दीजिये ये बाद में बाजार लगाने में काम आएगा , हां अब जो आपका जो तथाकथित धर्म निरपेक्ष हिस्सा था, हिन्दुस्तान ... इससे भी भाषा से बात लीजिये , २८ भाषायें , २८ हिस्से , फ़िर बच्चे हुए हर भाग को और लोगो को जात पात ,धर्म विधर्म , बड़े छोटे के आधार पर बाटे॥ अब आपके पास कई सारे छोटे छोटे हिस्से है , अभी भी ये सब कच्चा है इससे नफरत की आग पर पकाए और पकने दे और पकाने वाले बावर्ची जिसे नेता बोलते है को सोये रहेने दे , उससे वैसे भी कोई मतलब...

अकेला मन

अकेलापन , होता क्या है . जब कोई साथ हो तो भी तो अकेले हम है , साथ और अपनेपन से केवल एक अहसास होता है , की कोई है जो परवाह करता है कोई है जो आपके सुख और दुःख बांटना चाहता है , सच्चे साथ में इसी लिए एक विश्वास होता , निस्वार्थ होने का विश्वास , भीतर देखो , कोई है , कोई नही सिर्फ़ तुम हो , शायद वो भी नही , बात यह है की अगर समझो तो सच्चा साथी तो मन है , मन ही साथी जो दुःख में अकेलेपन का अहसास है करता और सुख में साथ का और अपने पन का अहसास करता है , मन ही सारे प्रश्न है करता , मन ही उनको पूरे करता , मन नियंरित हो तो जीवन ऐकाग्र्य अश्व के जैसे बढ़ता , मन रुलाता मन हंसाता , मन ही सारे मेल करता , मन है विश्वास , मन है कनक , जो समजता वाही आगे बढ़ता जय पारा जय , लाभ और हानि , मन बनाये सारी कहानी , मन है भोला मन है चंचल , मन निर्मल ये संतो की वाणी मन ही राम , मन ही कुरान , मन ही सूरज मन ही चाँद , धनसंपदा से अधिक संपन्न वो जिस का मन प्रसन्नता की खान , मन की trishna मन की शान्ति लाख धन से ना मिलती , मन करता , मन है कर्म का उद्गम ,मन से ही मुक्ति है मिलती

मेला

Image
हर चहरे पर चहरा है , हर हँसी पर में छुपी उदासी है हर साथी का साथ है सौदा जिसकी कीमत खासी है साथ केवल पीड़ा देता है पर ये दुनिया का मेला है मेले की हर बात निराली उसमे कई खेल तमाशे है, जीवन भी मेले जैसा है, पर इसके खेल सताते है दुखी सा है मन , अजब सा परेशान है तन मन थोडी सी है कुछ हल चल , पर खोया है वो बीता अपनापन आसपास बहौत है लोग पर , नज़र ना आए साथ है कौन , खोये अपने भी भीड़ में , अनजान हो गए सब है मौन, अधुरा , अनमना सा , कुछ खाली कोई कोना इस मन में , दे रहा टीस , पीड़ा भी , कुछ पानी भी आया इन आँखों में , पता नही ये पानी है या आंसू , फर्क क्या है दोनों में , शायद पीछे कोई पीड़ा तो है पर पता नही वो क्या है और नही पता क्यो है सब ऐसा , लगता बिखरा बिखरा सा , खोया में हु , या खो गए वो जो अहसास देते थे कुछ अपना सा, जिस पहेचानी दुनिया जिसको देखा समझा था , अब उसकी पहेचान भी अनजानी है , अपनी परचाई समझ जिसे रखा साथ में , अब वो मुझसे ही बेगानी है यादें भी तो नही लगती अपनी , वो भी बहौत पुरानी है , और मुझे यादों पर भी शक है , वो सच थी या फ़िर बेमानी है !

यादों की गुत्थी

Image
बीती यादें .. बहेता पानी, दोनों की एक सी कहानी ,, पानी का अन्नंत प्रवाह है ,यादों को भी यही कहा है पल जो बिता ना वापस आए बीते पल , पल पल तडपाये . चले जाते है वो फ़िर ना आने के लिए , पीछे रह जाए सब , सताने के लिए ॥ काली परछाई जैसे साए , यादों की पहेचान बताये .. अच्छी मीठी कड़वी यादे , खट्टी इमली जैसी बातें , सतरंगी से इस जीवन सतरंगी ही होती यादें ,, जीवन चक्र बड़ा ही अनिश्चित ,बीते दिनों की पूंजी ही सुरक्षित , पर अवरुद्ध करे ये मार्ग कभी , यादों में डूबे है सभी ,, जैसी पानी बहेता जाए प्रवाह ही उसे अमृत बनाये , वर्तमान की कर पहेचान ,ये भी होगा यादों के समान, जाग ज़रा तू भूत भविष्य की उलझन से , वर्तमान की इस खिड़की में झाँक ज़रा तू सुनहरी अनजान सी दुनिया है परन्तु अनिश्चित में ही निश्चित उलझा है ,